आजादी के स्वर

 

हमारे स्वतंत्रता सैनानियों ने अनगिनत दर्द सहते हुए भी हंसते-हंसते अपनी जीवन का बलिदान कर इस देश को आजादी दिलवाई। आज के युवाओं में भी देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी है, लेकिन आधुनिकता के बहाव में वह इन महान बलिदानियों के बलिदानों से कहीं न कहीं अनभिज्ञ से ही हैं। आजादी का ऐतिहासिक दिन समय के साथ सिर्फ सरकारी आयोजन मात्र बनता जा रहा था,देश कि अस्मिता से जुडा इस खास दिन हर देशवासी जुड़े, देशवासियों खास तौर से युवा पीढ़ी में राष्ट्र के प्रति त्याग, बलिदान और समर्पण की भावना का विकास करने के उद्देश्य से आजादी के इस पावन दिन को दशहरा, दिवाली, ईद की तरह पूरे उल्लास के साथ मनाने के लिए आजादी की पूर्व संध्या पर वर्ष 2006 में पहली बार कोटा शहर में आजादी के स्वर कार्यक्रम का आयोजन कर जन-जन को इससे जोड़ने का प्रयास किया। वर्ष प्रतिवर्ष लोग आजादी के स्वर के माध्यम से पूरे जोश के साथ आजादी के जश्न में शामिल होने लगे हे। समाज का हर तबका कार्यक्रम से जुड़ा और खुद को गौरवान्वित महसूस करता है। इसके अतिरिक्त शहीद स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजली, स्वतंत्रता सैनानियों का सम्मान, विशाल संकल्प मार्च, देश भक्ति गीतो पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम, निबंध प्रतियोगिताऐ, जैसे विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से स्वाधीनता दिवस को जन-जन का उत्सव बनाने का प्रयास किया। विगत 13 वर्षों से आजादी के जश्न को आजादी के स्वर कार्यक्रम के तहत प्रतिवर्ष बेहद सफलतापूर्वक आयोजित किया जा रहा है,आजादी के जश्न में समूचे शहरवासी पूरे उत्साह एवं उमंग के साथ कार्यक्रम में शामिल हो राष्ट्रभक्ति का परिचय देते हैं।

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