चप्पल वितरण

 

तपन से मिली पैरो को राहत..

वर्ष 2009 में जून की तपती दोपहरी में किसी काम के सिलसिले में वातानुकूलित कार में जाते समय नजर सड़क पर चल रहे एक करीब 10 वर्षीय बच्चे पर गई तो उसके पैरों में कुछ नहीं था वह नंगे पॉव ही तेजी से चल रहा था। मन में एक ही विचार आया कि असहनीय गर्मी और तपती रोहिणी में कोई व्यक्ति किस तरह नंगे पैर आग सी जल रही सड़क पर इस तरह नंगे पैर चल सकता है। मैंने गाड़ी को तत्काल रूकवाया। संयोग से नजदीक ही जूते-चप्पल की एक दुकान थी। उस बच्चे को दुकान पर ले गया और उसकी पसंद की चप्पल दिलवाई। उसके चेहरे पर संतोष भरी हंसी देख जो सुकून मिला उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। यह घटना एक प्रेरणा बनी, जिसके बाद अभावग्रस्त लोगों को चप्पल भेंट करने की सामूहिक प्रयास किया। समाजसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियां व प्रबुद्ध नागरिकों को इस मुहिम से जोड़ते हुए एक वाहन में बडी संख्या में छोटी बड़ी चप्पले भरकर शहर की लगभग सभी कच्ची बस्तियों में जाकर हालात देखे बस्तीयों में जो भी जरूरतमंद मिला, उसे चप्पल पहनाई। चप्पल जैसी मामूली चीज कितना बड़ा उपहार हो सकती है, इसका अंदाजा मुझे उनके चेहरों की खुशी देखकर महसूस हुआ। लोगो से आहवान किया कि वह अपने वाहनो में दो तीन जोड़ी चप्पले रखकर चलें, सड़क किनारे या कार्यक्षेत्र में कहीं भी जब कोई नंगे पैर नजर आये तो तुरंत उसे चप्पल पहनाकर राहत दिलवायें। कम खर्च लेकिन अधिक मदद के इस अभियान में सहयोगी बने प्रबुद्वजनजनों द्वारा मदद के इस अभियान में पूर्ण सहयोग किया जा रहा है। सामूहिक प्रयासो से अब तक बड़ी संख्या में अभावग्रस्त व्यक्तियों एवं बच्चों को चप्पलें पहनाकर तपन से राहत का प्रयास किया गया है, जनसहयोग से मदद का यह सिलसिला लगातार जारी है।

Back to Top