मेरी पाठशाला

 

कच्ची बस्ती के बच्चों को भी शिक्षा के उजियारे में प्रकाशित करती..

शिक्षा नगरी के रूप में कोटा शहर ने देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। इस शहर ने बेहतर शिक्षा के महौल से ना जाने कितने विद्यार्थियों के सपनों को साकार किया है। इन्ही सपनों के बीच वो अपने भी है जिन्होनें कभी सपने ही नहीं देखे। कच्ची बस्तियों में रहने वाले बच्चे शिक्षित होने के हक से कौसों दूर है। दो वक्त की रोजी रोटी के जुगाड़ में इनके माता पिता भी वो रास्ता नहीं दिखा पाते जो इन बच्चों के भविष्य को नई रोशनी दे सकता है। कंकरीट के बिछोने और एक तिरपाल की छत के नीचे जिंदगी बसर करने वाले बस्ती के चल परिवार मजदूरी की तलाश में आधुनिक जनजीवन से कई पीछे छूटते जा रहे है।
ऐसे बच्चों को जनसहयोग से शिक्षित कर इनका भविष्य उज्जवल करने के साथ सम्पूर्ण समाज को साक्षर करने का प्रयास किया। शहर के मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित कच्ची बस्ती मे जनसयोग से बस्ती में ही एक मेरी पाठशाला नाम से टीन शैड के पोर्टेबल स्कूल स्थापित किया।ं मेरी पाठशाला का एक ही उदृदेय कि धुमंतु जाति के इन बच्चों के जीवन में शिक्षा का उजाला करना था ताकि इनके जीवन में अशिक्षा का अंधियारा दूर हो ओर वह अपने सुनहरे भविष्य का द्वार खोल सकें। इस विद्यालय में बच्चों को शिक्षा प्रदान की जाती है साथ ही भोजन, कपड़े और बुनियादी सेवऐ भी जनसहयोग से उपलब्ध करवाई जा रही है। यह एक प्रयास है उन सपनों को पूरा करने का जो अभी तक यह बच्चे खुद देख ही नहीं पाये थे। लेकिन सामाजिक सहयोग से अब उम्मीद जगी है तो इनकी जिंदगी में भी उजियारा होगा।

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