वरिष्ठजनों का आर्षीवाद

 

वरिश्ठजन हमारे अखण्ड भारत की नींव है यह हमारे समाज की आधारषिला है।बुजुर्गो का सम्मान करना हमारा दायित्व है। विडंबना है कि आधुनिक युग में परिवार के बजुर्गो एवं वर्तमान पीढ़ी में काफी दूरियॉ बढ़ गई है।ऐसे में बुजुर्गो के सम्मान में भी कहीं न कहीं कमी आई है। वह स्वयं को परिवार एवं समाज से कटा हुआ महसूस करने लगे है। बुजुर्गो के कार्यानुभव एवं सामाजिक समर्पण के आधार पर वरिश्ठजन सम्मान समारोह आयोजित कर बुजुर्गो का सामुहिक सम्मान कर आर्षीवाद लिया।

वरिश्ठजन सम्मान समारोह में बुजुर्गो का सम्मान करने के साथ-साथ उनके अपने कार्यानुभवों के आधार पर षहर के विकास हेतु सुझाव लेकर षहर के विकास को नई दिषा दी।

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